पैकेट पर लाल निशान का क्या मतलब है? भारत में Food Labelling के नियमों को समझें
संक्षेप में
आज बाजार में पैकेट वाला खाना खरीदना हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। बिस्किट, नमकीन, ब्रेड, इंस्टेंट नूडल्स, breakfast cereals, packaged drinks और ready-to-eat foods—इनमें से कई चीजें हमारी shopping list में शामिल रहती हैं।
लेकिन पैकेट खरीदते समय हमारी नजर अक्सर सिर्फ ब्रांड, कीमत और पैकेट पर लिखे बड़े-बड़े दावों पर जाती है। “Healthy”, “Natural”, “High Protein”, “Multigrain” या “No Added Sugar” जैसे शब्द तुरंत ध्यान खींचते हैं। असली जानकारी अक्सर पैकेट के पीछे मौजूद छोटे अक्षरों में छिपी होती है।
यहीं काम आता है Food Label।
भारत में packaged food की labelling के लिए Food Safety and Standards Authority of India यानी FSSAI के नियम लागू होते हैं। Food Safety and Standards (Labelling and Display) Regulations, 2020 इस व्यवस्था का प्रमुख हिस्सा हैं और FSSAI के रिकॉर्ड में इसके 2021, 2022, 2025 और 24 मार्च 2026 तक के संशोधन दर्ज हैं।
FSSAI क्यों तय करता है कि पैकेट पर क्या लिखा होना चाहिए?
Food label का उद्देश्य सिर्फ product की पहचान कराना नहीं है। उपभोक्ता को यह भी पता होना चाहिए कि वह क्या खरीद रहा है, उसमें कौन-कौन सी सामग्री है और उसमें ऊर्जा तथा प्रमुख पोषक तत्व कितनी मात्रा में हैं।
इसी वजह से labelling regulations में ingredients, nutrition information, date marking, vegetarian/non-vegetarian declaration और दूसरी महत्वपूर्ण जानकारियों से जुड़े प्रावधान हैं।
Ingredients List को जरूर पढ़ें
किसी पैकेट वाले खाद्य पदार्थ को समझने का सबसे आसान तरीका है उसकी Ingredients List देखना।
पैकेट के सामने “Healthy” या “Multigrain” लिखा देखकर product खरीदने से पहले पीछे दी गई ingredients list पर नजर डालें। इससे यह पता चलता है कि उत्पाद बनाने में किन सामग्रियों का इस्तेमाल हुआ है।
Food additives की declaration के लिए भी labelling regulations में प्रावधान हैं। इसलिए ingredients list केवल औपचारिक जानकारी नहीं है, बल्कि product की composition समझने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
Nutrition Information में किन चीजों पर नजर डालें?
Food label पर दी गई nutrition information को समझना भी जरूरी है। आम तौर पर उपभोक्ता को इन चीजों पर ध्यान देना चाहिए:
- Energy/Calories
- Protein
- Carbohydrate
- Total Sugar
- Total Fat
- Saturated Fat
- Trans Fat
- Sodium
- Dietary Fibre, जहां लागू हो
लेकिन यहां Serving Size को नजरअंदाज करना सबसे आम गलती है।
अगर किसी packet पर nutrition information एक serving के लिए दी गई है और आप पूरा packet खा लेते हैं, तो वास्तविक intake label पर दिखाई गई एक serving से कहीं अधिक हो सकता है।
अब बात उस “लाल Warning Label” की
Food labelling को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा जिस विषय की होती रही है, उनमें Front-of-Pack Nutrition Labelling यानी FOPNL भी शामिल है।
इसका विचार यह है कि पैकेट के सामने ही सरल तरीके से यह जानकारी दिखाई जाए कि किसी food product में energy, sugar, saturated fat और sodium जैसे nutrients कितनी मात्रा में हैं।
FSSAI ने HFSS यानी High Fat, Sugar and Salt foods के लिए front-of-pack nutrition labelling से जुड़े प्रस्ताव और drafts जारी किए हैं। एक प्रस्ताव में high-risk nutrients की जानकारी को रंगों के माध्यम से अधिक आसानी से समझाने की बात कही गई थी।
पुराने FSSAI draft material में high fat, sugar and salt वाले products के लिए nutrient blocks को red colour में दिखाने का प्रस्ताव भी सामने आया था। इसका उद्देश्य था कि उपभोक्ता पैकेट के सामने देखकर तुरंत समझ सके कि किसी product में कुछ nutrients का स्तर अधिक है।

लेकिन यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है
सोशल मीडिया या पुराने articles में “अब हर पैकेट पर लाल warning label लगेगा” जैसी बातें मिल सकती हैं। इन्हें वर्तमान अनिवार्य नियम मानना सही नहीं होगा।
FSSAI की आधिकारिक regulations और notifications को देखकर ही यह तय किया जाना चाहिए कि कोई proposed/draft labelling व्यवस्था अंतिम रूप से लागू हुई है या नहीं।
इसलिए लाल रंग वाला HFSS warning label अभी हर packaged food पर लागू मौजूदा अनिवार्य label के रूप में नहीं लिखा जाना चाहिए।
Red Label का विचार क्यों महत्वपूर्ण माना गया?
Front-of-pack warning या colour-coded nutrition information का मूल उद्देश्य एक ही है—उपभोक्ता को जानकारी समझने में ज्यादा समय न लगे।
मान लीजिए किसी व्यक्ति के सामने एक ही category के पांच packaged snacks रखे हैं। अगर उसे हर packet के पीछे ingredients और nutrition table को विस्तार से पढ़ना पड़े तो तुलना करना मुश्किल हो सकता है।
Front-of-pack information इसी प्रक्रिया को आसान बनाने की कोशिश करती है।
लेकिन किसी food product की पूरी nutritional quality को केवल लाल, हरे या किसी एक colour से तय करना भी पर्याप्त नहीं है। Ingredients, serving size और पूरी nutrition information देखना जरूरी रहता है।
Sugar, Fat और Sodium पर खास नजर
अगर आप packaged food खरीद रहे हैं तो sugar, fat और sodium को जरूर देखें।
खासकर ऐसे products में जहां रोजाना ज्यादा मात्रा में consumption हो सकता है, nutrition label को समझना उपयोगी है।
किसी product पर “Low Fat” लिखा होने का मतलब यह नहीं कि वह हर व्यक्ति के लिए automatically healthy choice है। इसी तरह “No Added Sugar” का दावा देखकर total carbohydrate और ingredients की जानकारी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
Vegetarian और Non-Vegetarian Symbol भी देखें
भारत में packaged food की पहचान के लिए vegetarian और non-vegetarian declaration महत्वपूर्ण है।
FSSAI के labelling provisions के तहत vegetarian और non-vegetarian food के लिए निर्धारित symbols का इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए product की प्रकृति को लेकर अनुमान लगाने के बजाय पैकेट पर दिया गया निर्धारित symbol देखना बेहतर है।
Food Allergy वाले लोगों के लिए Label और भी जरूरी
कुछ लोगों को दूध, अंडा, मछली, सोया, gluten-containing cereals या अन्य खाद्य घटकों से allergy हो सकती है।
ऐसे लोगों के लिए ingredients और allergen information को पढ़ना खास तौर पर जरूरी है। Food labelling व्यवस्था में allergen declaration से जुड़े प्रावधान मौजूद हैं।
इसलिए अगर परिवार में किसी व्यक्ति को food allergy है तो shopping करते समय केवल product का नाम या advertisement देखकर निर्णय नहीं लेना चाहिए।
Best Before और Expiry Date भी पढ़ें
Food label पढ़ते समय date marking को कभी न भूलें।
पैकेट पर Best Before या अन्य date information यह समझने में मदद करती है कि product को किस अवधि के भीतर और किन storage conditions में इस्तेमाल करना चाहिए।
इसलिए खरीदते समय date के साथ storage instructions भी देखना समझदारी है।
“Healthy” देखकर तुरंत भरोसा क्यों न करें?
आज food companies packaging पर कई तरह के nutritional और health-related claims करती हैं।
“High Protein”, “Rich in Fibre”, “Multigrain”, “Natural”, “No Added Sugar” और “Low Fat” जैसे शब्द उपभोक्ता का ध्यान आकर्षित करते हैं।
लेकिन FSSAI के advertising and claims regulations के अनुसार food claims को truthful, meaningful और non-misleading होना चाहिए।
इसलिए किसी भी claim को समझने के लिए उसकी पुष्टि Nutrition Information और Ingredients List से करना बेहतर है।
Food Label पढ़ने का आसान Formula
अगली बार supermarket जाएं तो यह छोटा-सा formula याद रखें:
देखें → पढ़ें → तुलना करें
देखें: Front of Pack पर क्या दावा किया गया है?
पढ़ें: Ingredients, Nutrition Information, Serving Size, Allergen और Date Marking।
तुलना करें: उसी category के दूसरे products से sugar, sodium, fat, protein और fibre की तुलना करें।
और अगर किसी product पर भविष्य में लागू होने वाली या अलग regulatory व्यवस्था के तहत कोई front-of-pack warning/colour-coded information दिखाई दे, तो उसे भी label की दूसरी जानकारी के साथ समझें।
निष्कर्ष
Food label पढ़ने में शायद 30 सेकंड ज्यादा लगें, लेकिन यही छोटी-सी आदत shopping को ज्यादा informed बना सकती है।
पैकेट के सामने लिखा बड़ा दावा सिर्फ कहानी का एक हिस्सा है। असली तस्वीर समझने के लिए पैकेट को पलटकर Ingredients, Nutrition Information, Serving Size, Sugar, Fat, Sodium, Allergen Information और Date Marking जरूर देखें।
और जहां तक लाल warning label का सवाल है, इसे लेकर पुराने drafts और वर्तमान लागू नियमों में अंतर समझना जरूरी है। FSSAI ने front-of-pack nutrition labelling और HFSS foods को लेकर प्रस्ताव दिए हैं, लेकिन किसी प्रस्ताव को तब तक वर्तमान अनिवार्य नियम नहीं माना जाना चाहिए जब तक वह आधिकारिक रूप से लागू न हो जाए।
यानी अगली बार पैकेट खरीदते समय सिर्फ यह न पूछें—“इस पर क्या लिखा है?”
एक सवाल और पूछें—“लेबल मुझे वास्तव में क्या बता रहा है?”


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